Saturday, November 28, 2020

सामने वाले खुद से लड़ते हुए

खुद से लड़े हो कभी, कभी खुद पर वार किया है
खुद से जीते हो कभी खुद को हराकर
अपना लहू कैसा है मालूम है क्या तुमको
चीर कर देखा है क्या खुद को कभी?

उन्हें कमजोर मत समझो जो शांत दिखाई देते हैं 
कभी यह भी मत मान लेना 
कि जो शांत है वह कम लड़ाका होगा
कि जो शांत है उसे कभी भी हराया जा सकता है

ऐसे कुछ लोगों को मैं जानता हूं 
वे अक्सर लड़ रहे होते हैं अपने भीतर कोई लड़ाई
और लहू बस खत्म होने वाला होता है
वहां बोल कर लहू को व्यर्थ बर्बाद करने की गुंजाइश नहीं होती

भीतर की खुद से लड़ाई को बाहर के शोरगुल से बचाना जरूरी होता है
जीतने के लिए करनी पड़ती है सतत लड़ाई
इस विचार को कि खुद से लड़ना व्यर्थ है पटकनी देनी पड़ती है बार-बार
उसके लिए
गहरे उतर कर बनाई जाती है रणनीति युद्ध की
नहीं तो सामने वाले खुद को सब पता चल जाता है

खुद से लड़ने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए होती है
कुछ मत बोलो, चुप रहो 
जब तक कि तुम नहीं
कूद पड़ते हो अपनी खुद की लड़ाई में.
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