फिर मिल जाता है आसमान
जब परिंदो में उडान लौट आती है
कल रात कुछ ऐसा ही हुआ
थका सा, एक शाख पे
थका सा, एक शाख पे
वो बैठा था
जब छू गयी थी कोइ संजीवनी हवा
परो पे ताजे कुछ जोश उभर आए थे
और वो उड चला था
और देखा कि बेजान परो पे
फिर से वही उडान लौट आयी थी
उसके सामने
उसके सामने
अब फिर से एक पूरा आसमान है
उस संजीवनी हवा में तेरा स्वर था प्रिये