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Wednesday, May 13, 2009

फिर मिल जाता है आसमान

फिर मिल जाता है आसमान
जब परिंदो में उडान लौट आती है

कल रात कुछ ऐसा ही हुआ
थका सा, एक शाख पे
वो बैठा था
जब छू गयी थी कोइ संजीवनी हवा
परो पे ताजे कुछ जोश उभर आए थे
और वो उड चला था
और देखा कि बेजान परो पे
फिर से वही उडान लौट आयी थी

उसके सामने
अब फिर से एक पूरा आसमान है
उस संजीवनी हवा में तेरा स्वर था प्रिये