लबो पे हरकत करती रही
पर कश में नहीं आयी
हजार बार जलायी
पर तलब जली नही
धुएँ बनते रहे हालाँकि
रात कैक्टस के सिरहाने जागती रही
आँखों में नींद चुभती रही
यूँ ही पड़े पड़े थकता रहा समय
कमरा धुएँ सा ही रहा
दीवारें सलेती होती रहीं
बहूत देर इंतज़ार किया पर
कोई नही आया
न सुबह ना ही नींद