गर्मियों के मौसम आ गए,
आँगन में
देर तक सीधी तेज धूप गिरती है
नमी के कतरे
एक-एक कर उडे जा रहे हैं
और जल्द हीं खत्म हो जाने को हैं
आँगन की मिटटी
और रेत के बीच के सारे फर्क
लू के थपेडे बहा ले गए हैं
वो भी अपना सारा बादल समेट कर
आसमान के दूसरे कोने में चली गई है
पर आँगन में, उगाया था
जो पौधा प्यार का
अभी भी सूखता नही
जाने कहाँ से लेता है नमी
और कैसे बचाता है लू के थपेडों से ख़ुद को
सूखे रेतीले मौसमो के थपेडो में
टिके रहने के नजरिये से
कैक्टस से बढ़ कर है प्यार!