अंतर्नाद
कविता...तेरे शहर में फिर आसरा ढूंढने निकला हूँ!
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Sunday, June 28, 2009
इश्क में
रिश्ते घने हो जाते हैं जब
कोहरे की तरह,
तो इश्क हो जाते हैं
तभी तो दिखाई नही देता
कुछ भी इश्क में.
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