कुछ दुखों कों अस्तित्व में आना था
मेरा शरीर काम आया
मुक्त हुए वे देह पाकर
मगर अपनी अंतिम यात्रा पे
जाते-जाते
वे राह बता गए
और कई सारे दुखों को
और तब से उनकी आमद
बदस्तूर जारी है
सोंचता हूँ
बहुत सारे सुख भी होंगे
कतार में
देह पाकर प्रकट होने जाने के वास्ते खड़े
फिर सोंचता हूँ
शायद उन्हें भी
बता गए हों कुछ पूर्वज सुख
कुछ पते-ठिकाने
जहां प्रकट हो रहे हों वे लगातार
मैं अपनी देह लेकर
नहीं गया कभी उन तक
न हीं कोशिश की
कि पता चले उनको मेरी देह का पता
जाने क्यूँ मुझे हमेशा लगता रहा है
कि इस दुनिया से
पहले दुखों का मुक्त होना जरूरी है...