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Monday, September 7, 2009

सिर्फ तुम पर है !!!

अपनी लौ से लबरेज हथेली
रख दो आज
मेरी तनहा हथेली में

बरसों से परत-दर-परत
जमा हुआ मोम
पिघला कर
बहा दो
मेरी आँखों के कोरों से

ओस सी चिकनी
और पारदर्शी सुबह
उगा दो मेरी आँखों में

समझ लो
अपनी हथेली से
मेरी हथेली कों

मेरा होना अब
सिर्फ तुम पर है