एक नींद से बिछड़ा हूँ मै
एक ख्वाब का टुकड़ा हूँ मैं
चील सी उड़ती हवाएं
धूप जैसे चोट खाए
कुछ संग थे जो अरमान वो अरमान बिखरते गए
साथ में बिखरा हूँ मैं
एक नींद से बिछड़ा हूँ
मै एक ख्वाब का टुकड़ा हूँ मैं
हालात गिरते गये
रंगरेज उजड़ते गये
धूप में धुंधले हुए सब श्याम पे ठहरा हूँ मैं ,
रंग का उतरा हूँ मैं
एक नींद से बिछड़ा हूँ मैं
एक ख्वाब का टुकड़ा हूँ मैं