अंतर्नाद
कविता...तेरे शहर में फिर आसरा ढूंढने निकला हूँ!
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मुठी
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Friday, August 14, 2009
एक कसी मुट्ठी वाली कविता
लड़की
सिक्का
-
सिक्का
जमा
कर
रही
है
धारदार
अक्षरों
और
नोकीले
शब्दों
को
जो
कभी
नही
रहे
उसके
गुल्लक
में
और
पिरोने
की
तयारी
में
है
एक
कसी
मुट्ठी
वाली
कविता
लड़की
को
मिल
गया
है
आसमान
जहाँ
वो
अभिव्यक्ति
रख
सके
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