Showing posts with label पोएट्री. Show all posts
Showing posts with label पोएट्री. Show all posts

Sunday, February 15, 2009

उबासी लेते लम्हें

कहीं से भी, कभी भी
चली आती है वो और
पालथी मार कर बैठ जाती है
घड़ी की सुइओं पर

वक्त कुछ देर तक दमघोंटू गले से
टिक टिक करता रहता है
और फ़िर बंद हो जाता है आखिरकार

खूब सारा समय इकठ्ठा हो जाता है
खत्म नही होते दिन
लाख भटकने पे भी
और रात भी मुंदी पलकों के नीचे जागती रहती है

लम्हें बैठे बैठे
उँगलियाँ फोड़ते रहते हैं
पर पोरों से
तेरे न होने का दर्द जाता नही

बहुत देर तक जब बैठी रह जाती है तन्हाई
घड़ी की सुइओं पर
और
पृथ्वी नही घूम पाने की वजह से
बेचैन हो जाती है
तो सिगरेट के बहाने सुलगा लेता हूँ
थोड़ा सा वक्त

काट लेता हूँ थोड़ा सा वक्त
सिगरेट के साथ और तुम्हारे बगैर

फ़िर सोंचता हूँ
सिगरेट के तुम्हारे स्थानापन्न हो जाने के बारे में
और फेंक देता हूँ उसे।

आज समय फिर सुबह से हीं बंद पड़ा है
पर मैंने नही सुलगाई एक भी सिगरेट.

Wednesday, November 12, 2008

गुमान

इबारतें तुम्हारी, उगती रहती हैं
मेरे कान टिके रहते हैं उन पर

ये इबारतें,
जो तुम्हारे फिर फिर अंकुरित होने के
निशान हैं,
गुमान है मेरे लिए
कि तुम हरे हो अब तक
कि तुम्हारी इबारतों में मेरी नमी का जिक्र होता रहता है
कि तुम कहते होसब मेरी नमी की बदौलत उगता है

हालांकि तुम्हारी डायरी के पन्ने
नही छुए मैने एक अरसे से,
एक अरसा हुआ उनकी फड़फड़ाहट गये कानो में,
पर,
कहाँ भूल पाई हूँ
उन पुरानी इबारतों को भी
जो तब लिखे थे तुमने

और तुम्हे बता दूँ
आज भी वे बोलती हैं
तो बदन पे हर हर्फ उभर जाता है

पर,
हम जितना हीं जी पाए
उन लम्हों को,
जितनी देर हीं ख्वाहिशों को खिलाया
हमने अपनी हथेली पर,
जो भी हासिल हो पाया हमे
तुम्हें बार-बार अंकुरित करने के लिए
और मेरे बदन पे हर्फ उभारने के लिए
काफी है.
है ना!!!

Monday, October 13, 2008

बातें जगह घेरती हैं



बातें आती हैं जाती हैं पर खत्म नही होतीं
ढूँढती रहती है अफ़सानों में अपनी जगह
खोलती रहती हैं पुरानी सन्दुकेन
यादों की पुरानी जंग लगी तहें.

बातें दूर तक साथ जाती हैं
गर उन्हें किसी नम रसीले गले का सहारा मिल जाता है
गर किसी अहसास के साथ उन्हें किसी अफ़साने में जगह दे दी जाती है.

पर आवाज़ और अफ़साने की गैर हाज़िरी में भी वे
अपने पूरे वजूद के साथ जिंदा रहती है
और वक़्त बे-वक़्त हमें सराबोर करती रहती है

बातों का वजूद हमारे अडोस पड़ोस में हमेशा जगह घेरती है