Thursday, June 9, 2011

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मुझे अफसोस है
सारा प्यार मैंने एक जगह हीं लगा दिया
नही रखा मैंने
तुम्हारे सिवा कोई दूसरा विकल्प

मुझे क्या पता था
कि बारिशें होती रहेंगी आगे
तुम्हारे बिना भी
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9 comments:

Sonal Rastogi said...

ऐसी विरह ...आने वाले सुहाने मौसम से डर लगता होगा ना

M VERMA said...

संशय नहीं तो विकल्प कैसा!!
और फिर प्यार एकमुश्त ही लगाई जाती है

pallavi trivedi said...

बारिश का मौसम और उदास कविता... साथ साथ चलते हैं!

पारुल "पुखराज" said...

वाह!

प्रवीण पाण्डेय said...

घनीभूत विरह पीड़ा।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

gehri rachna

वन्दना said...

आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
http://tetalaa.blogspot.com/

***Punam*** said...

"मुझे अफ़सोस है

सारा प्यार मैंने एक जगह ही लगा दिया

नहीं रख मैंने

तुम्हारे सिवा कोई दूसरा विकल्प "



मुझे क्या पता था

कि बारिशें होती रहेंगी आगे

तुम्हारे बिना भी......"



और जब कोई विकल्प न हो तो

यूँ ही बारिश में भींगने का मज़ा

कुछ और ही हो जाता है...!!



just excellent..!

डिम्पल मल्होत्रा said...

kitna khoobsurat likhte the aap