मुझे अफसोस है
सारा प्यार मैंने एक जगह हीं लगा दिया
नही रखा मैंने
तुम्हारे सिवा कोई दूसरा विकल्प
मुझे क्या पता था
कि बारिशें होती रहेंगी आगे
तुम्हारे बिना भी
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कुछ शब्द जो मेरे मौन के खाली घर में आते हैं उन्हें मैं आवाज की पनाह में लाने की कोशिश करता हूँ . बस यही करता रहा हूँ .
8 comments:
ऐसी विरह ...आने वाले सुहाने मौसम से डर लगता होगा ना
संशय नहीं तो विकल्प कैसा!!
और फिर प्यार एकमुश्त ही लगाई जाती है
बारिश का मौसम और उदास कविता... साथ साथ चलते हैं!
वाह!
घनीभूत विरह पीड़ा।
gehri rachna
आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्वागत है
http://tetalaa.blogspot.com/
"मुझे अफ़सोस है
सारा प्यार मैंने एक जगह ही लगा दिया
नहीं रख मैंने
तुम्हारे सिवा कोई दूसरा विकल्प "
मुझे क्या पता था
कि बारिशें होती रहेंगी आगे
तुम्हारे बिना भी......"
और जब कोई विकल्प न हो तो
यूँ ही बारिश में भींगने का मज़ा
कुछ और ही हो जाता है...!!
just excellent..!
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