Saturday, March 7, 2009

जीवन परमात्मा है

जिंदगी
जो भी उगा दे
तुम्हारी मिटटी में
अपना लो उसे

जिन्दगी
जो भी पका दे
तुम्हारे पतीले में
खा लो उसे

जिंदगी
जो भी सुना दे
तुम्हारे कानो में
सुर दो उसे

जिंदगी
जो भी दिखा दे
मान लो सच उसे

परमात्मा के बनाये जीवन में
परमात्मा हीं दीखता है,
परमात्मा हीं बजता है,
परमात्मा ही खिलता है,
परमात्मा हीं मिलता है .

3 comments:

संगीता पुरी said...

वाह !!! कितनी सुंदर बातें कही ... कितने अच्‍छे ढंग से ... बहुत सुंदर रचना बन गयी ...बधाई।

संध्या आर्य said...

परमात्मा के बनाये जीवन में
परमात्मा हीं दीखता है,
परमात्मा हीं बजता है,
परमात्मा ही खिलता है,
परमात्मा हीं मिलता है .

parmatma hi milata hai ........
prakriti ke vishal god me yahi to parmatma hai
bahut khubsoort hai
aapke khyal....
thanks alot

SWAPN said...

bahut sunder om ji, holi ki shubhkaamnaon ke saath badhai.