Thursday, April 23, 2009

हर रिश्ते की एक उम्र होती है!

उसने कहा-
रिश्ते की शुरुआत लम्बी होनी चाहिए

उसने कहा कि
हर रिश्ते की एक उम्र होती है
और वो शुरूआती दौर में तय हो जाती है
जितनी तेजी से आप उस आरम्भ को ख़त्म कर देते हैं
उतनी जल्दी अंत शुरू हो जाता है
इसलिए
रिश्तों को अच्छी उम्र गर देनी हो
तो धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए
छोटे-छोटे कदमों से

उसने यह भी कहा कि
शुरुआत को लम्बा रखना
उस स्थिति में भी अच्छा होता है
जब उससे बाहर आना होता है
अगर हम तेज चल गए होते हैं
तो हमें वापसी में ज्यादा दूरी तय करनी होती है
और हमारे टखनों में ज्यादा दर्द होता है

मैंने कहा-
कि कुछ लोगों के पास
इतना वक्त बचा नहीं होता कि
शुरुआत को लम्बा रखते हुए
रिश्ते को उसके मोकाम तक पहुंचा सके

उसने कहा कि
रिश्ते की उम्र जिदगी की उम्र से बड़ी होनी चाहिए
और रिश्ता जिंदगी के बाद भी
मोकाम तक पहुँच सकता है.

मुझे उसका ये सब कहना अच्छा लगा था
तब भी, जब मेरे पास वक्त नहीं था

13 comments:

अनिल कान्त : said...

waah bhai ...dil ka ek sach kaha aapne ...bahut achchha laga

sandhya arya said...

उसने कहा कि
रिश्ते की उम्र जिदगी की उम्र से बड़ी होनी चाहिए
और रिश्ता जिंदगी के बाद भी
मोकाम तक पहुँच सकता है.

ये पंक्तियाँ जिसने ने भी कही है बहुत खुब कही है......

क्योकि कुछ रिश्ते समय से परे जाकर भी जीवित रहते है!

Nirmla Kapila said...

bahut sunder abhivyakti hai ye rishte bhi ajeeb rishte kabhi aag to kabhi thhandi baraf umar? bas ek haraf ugte hain suhane lagte hain fir beh jate hain meghon ki tarah badali ki umar jese

Harkirat Haqeer said...

आज कतार में आगे हूँ वो भी दिल से........!

उसने कहा कि
हर रिश्ते की एक उम्र होती है
और वो शुरूआती दौर में तय हो जाती है
जितनी तेजी से आप उस आरम्भ को ख़त्म कर देते हैं
उतनी जल्दी अंत शुरू हो जाता है
इसलिए
रिश्तों को अच्छी उम्र गर देनी हो
तो धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए
छोटे-छोटे कदमों से

लग तो रहा की उसने जो कहा सही कहा ...तो आप शुरुआत धीरे- धीरे जारी रखें.........

SWAPN said...

उसने कहा कि
हर रिश्ते की एक उम्र होती है
और वो शुरूआती दौर में तय हो जाती है
जितनी तेजी से आप उस आरम्भ को ख़त्म कर देते हैं
उतनी जल्दी अंत शुरू हो जाता है
इसलिए
रिश्तों को अच्छी उम्र गर देनी हो
तो धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए
छोटे-छोटे कदमों से

sahi kaha.sahaj pake so
meetha hoye.

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना!
आप का ब्लाग बहुत अच्छा लगा।
मैं अपने तीनों ब्लाग पर हर रविवार को
ग़ज़ल,गीत डालता हूँ,जरूर देखें।मुझे पूरा यकीन
है कि आप को ये पसंद आयेंगे।

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...
This comment has been removed by the author.
raj said...

mujko uska yeh kahna achha laga tab bhi jab mere pass waqat nahi tha....sach kaha aapne

डॉ .अनुराग said...

यकीनन हर रिश्ते की एक उम्र होती है....कुछ वेंटीलेटर पर दिन गुजारते है ....

vandana said...

rishta wahi rishta hai jo ek umra ke baad bhi jivit rahe............chahe kaise bhi bane magar ho aisa ki ik umra ke baad bhi kisi ke ahsaason mein zinda rahe.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

कुछ रिश्ते ता उम्र अपनी चमक नहीं खोते हैं ..

विनय said...

अत्यन्त प्रभावशाली रचना है

---
तख़लीक़-ए-नज़रचाँद, बादल और शामगुलाबी कोंपलेंतकनीक दृष्टा

कंचन सिंह चौहान said...

uski baat mujhe bhi achchhi lag rahi hai...aur sachchi bhi