Friday, February 19, 2010

मुहब्बत मानो फिर लौटी है

मुहब्बत मानो फिर लौटी है

बांहों को एक नाजुक से आगोश की आमद है
धडकनों को कुछ और धडकनों की आहट है

चाँद फिर कंगन सा है
और सितारे फिर आँचल सा

यूँ लगता है कि
वो मेरी उंगलियाँ ले जा कर
अपने हारमोनिअम पे टिका लेने वाली है
और मैं पिआनो की तरह बज जाने वाला हूँ

मैं जानता हूँ कि
इस भरी हुई रात में
मैं लिखूं गर कोई नज्म
तो उसके हर सफ्हे में मौजूद होओगी तुम
और तुम्हारी मुहब्बत भी

पर लिखने से पहले
याद आ जाती है वो पुरानी नज्में मेरी
जहाँ से चली गयी थी
वो और उसकी मुहब्बत...

17 comments:

रोहित said...

'par likhne se pehle yaad aa jaati hai wo purani najme meri,
jahan se chali gayi thi wo aur uski mohabbat'

bahut hi acchi rachna,om ji.

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!

Vivek Rastogi said...

वो और उसकी मोहब्बत..

और इंतजार करती हुई मुहब्बत मानो फ़िर लौटी है..

डूब गये हम तो इनमें..

Mithilesh dubey said...

बहुत ही खूबसूरत भाव ।

निर्मला कपिला said...

मै जानता हूँ ------ ओम जी एक बार फिर से कमाल की रचना ले कर आये आप। दिल को छू गयी
शुभकामनायें

Suman said...

nice

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

om bhai...
chot khaaye huye lagte ho...

sab sahi hai na???

Meenu Khare said...

पर लिखने से पहले
याद आ जाती है वो पुरानी नज्में मेरी
जहाँ से चली गयी थी
वो और उसकी मुहब्बत...

क्या बात है ओम जी. बहुत नाज़ुक नज़्म हुई है.

सागर said...

यूँ लगता है कि
वो मेरी उंगलियाँ ले जा कर
अपने हारमोनिअम पे टिका लेने वाली है
और मैं पिआनो की तरह बज जाने वाला हूँ

.... "छू लो बदन मगर इस तरह जैसे सुरीला साज़ हो"

प्रसून जोशी ने साँसों को साँसों में ढलने दो जरा (हम - तुम) में यही बात कही है.

बहुत Pratical ख्याल है .).).)

डिम्पल said...

मैं जानता हूँ कि
इस भरी हुई रात में
मैं लिखूं गर कोई नज्म
तो उसके हर सफ्हे में मौजूद होओगी तुम
और तुम्हारी मुहब्बत भी.
भूलना कहाँ उसे बस में है,
जब उसकी खुश्बू नफ़स नफ़स में है.
पर लिखने से पहले
याद आ जाती है वो पुरानी नज्में मेरी
जहाँ से चली गयी थी
वो और उसकी मुहब्बत...
आपकी नज़म में..
वसल की रुत भी गयी,हिज़र के मौसम भी गये.हमने इक उम्र में देखे है जमाने कितने..

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत खूब..

shikha varshney said...

khubsurat hamesha ki tarah

अमिताभ मीत said...

बहुत खूब !!

वन्दना said...

om ji
har baar itni umda rachna hotihai ki shabd khamosh ho jate hain..........prem ke sagar mein doobi huyi rachna .

sada said...

बहुत ही बेहतरीन शब्‍द रचना ।

शरद कोकास said...

विशुद्ध मोहब्बत ।

संजय भास्कर said...

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन

Sanjay kumar
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com