Monday, October 13, 2008

बातें जगह घेरती हैं



बातें आती हैं जाती हैं पर खत्म नही होतीं
ढूँढती रहती है अफ़सानों में अपनी जगह
खोलती रहती हैं पुरानी सन्दुकेन
यादों की पुरानी जंग लगी तहें.

बातें दूर तक साथ जाती हैं
गर उन्हें किसी नम रसीले गले का सहारा मिल जाता है
गर किसी अहसास के साथ उन्हें किसी अफ़साने में जगह दे दी जाती है.

पर आवाज़ और अफ़साने की गैर हाज़िरी में भी वे
अपने पूरे वजूद के साथ जिंदा रहती है
और वक़्त बे-वक़्त हमें सराबोर करती रहती है

बातों का वजूद हमारे अडोस पड़ोस में हमेशा जगह घेरती है

2 comments:

विवेक सिंह said...

अति सुन्दर !

PREETI BARTHWAL said...

बहुत खूब।