Friday, August 7, 2009

तुम्हारे मूड का भी न, कोई भरोसा नही !

एक अरसे बाद
बिताया सारा दिन आज तुम्हारे साथ

सुबह, तुम्हारे ख्वाब में आँख खोली थी
फ़िर बरामदे में कुर्सी डाले मारता रहा तुमसे गप्प
पूरे इत्मीनान से,
इसी बीच खत्म की चाय की दो प्यालियाँ भी

फ़िर कमरे में आकर,
रोशनदान से आती हुई धुप की जिस बारीक गरमाहट में
भींगता पड़ा रहा देर तक बिस्तर पे,
वो भी तुम्हारी हीं थी

जब नहाने गया तो
वहां भी आ गई तुम
पीठ पे साबुन मलने के बहाने

परोसा खाना अपने हाथ से
खाया मेरे साथ हीं आज कितने दिन बाद
और मेरे सिंगल-बेड पे मेरे साथ लेट कर फ़िर
सुनाती रही मुझे नज्में

फिर जरा सा आँख लगते हीं जाने कहाँ चली गई
उठा तो देखा कि शाम थी और उदासी थी

तुम्हारे मूड का भी न, कोई भरोसा नही!

38 comments:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

अच्छी लगी यह अभिव्यक्ति

AlbelaKhatri.com said...

"mood ka bhi bharosa nahin"
bahut khoob

umdaa rachna..............

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति ।

विवेक सिंह said...

बहुत सुन्दर सधी हुई अभिव्यक्ति ! बधाई !

Mithilesh dubey said...

बहुत ही सुन्दर रचना। बधाई

Dhiraj Shah said...

sundar rachana

raj said...

khushi or udasi se mili juli sunder kavita...

nanditta said...

बेहद पसंद आई आपकी यह रचना

विनय ‘नज़र’ said...

आपने तो मूड बना दिया
---
'विज्ञान' पर पढ़िए: शैवाल ही भविष्य का ईंधन है!

Ram Shiv Murti Yadav said...

Khubsurat Abhivyakti...badhai ho.

रश्मि प्रभा... said...

यादों की घाटी में सब सुन्दर था,दिन ढलते......उदासी भी बोल गई

Meenu khare said...

सुंदर प्रेम कविता आपके अपने अनोखे अंदाज़ में ...
कविता में तुम्हारी मूड की जगह यदि तुम्हारा मूड कर दे तो वाकई मूड बन जाए .

ओम आर्य said...

Shukriya Meenu ji.

vandana said...

waah......kya khoob bhav hain.

Prakash Jain said...

"tumhare mood ka bhi na, koi bharosa nahi! "

bahut khoob

Prakash Jain

Vijay Kumar Sappatti said...

just amazing , kya khoob likha hai mere dost , padhkar man ruk gaya hai mitr. bus badhai hi badhai.. lekin kya ye koi bimb se sajhi hui rachana hai .. main to kalpana lok me kho gaya dost . maaf karna bahut dino baad blogjagat me aaya hoon , aapki tippaniyo ka dil se shukriya ada karta hoon


regards

vijay
please read my new poem " झील" on www.poemsofvijay.blogspot.com

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

om ji...
kamal kita tussi...
very nice creation...

Prem Farrukhabadi said...

bahut hi sundar bhav. Badhai!

वन्दना अवस्थी दुबे said...

क्या कहूं..कुछ कहने लायक ही नहीं छोडते आप तो..कविता पढते समय एक-एक पंक्ति चल-चित्र की भांति चलती है आंखों के सामने और जैसे पूरी कविता को जी लेती हूं.

अर्शिया अली said...

अति सुन्दर.
{ Treasurer-T & S }

Navnit Nirav said...

Wakai aap bahut achcha likhte hain.Sahbd chitr mein to aapka koi javab nahi.par ek baat kahni hai ki rachna ka mood badal dein do behtar hoga,kyonki kaphi dinon se ek hi type ki rachnayein meine aapki padhi hain.
Navnit Nirav

jamos jhalla said...

yaadon se baahar niklo huzoor.vaastvik jeevan main bhee jhaanko.
angrezi-vichar.blogspot.com
jhalli-kalam-se
jhallevichar.blogspot.com

हेमन्त कुमार said...

sundar rachana...|

M VERMA said...

ओम जी
आपकी रचनाओ की सारी खूबसूरती उस कोमल और बारीक भाव मे होती है जो "तुम्हारे मूड का भी न, कोई भरोसा नही!" मे है.
एहसास के इसी बिन्दु पर तो शायद कविता मूर्त रूप लेती है.

ओम आर्य said...

Navneet Ji, You are right
I should change the mood of the poems.
Thanks for your kind suggestion.

अर्चना तिवारी said...

om ji bahut sunder rachna ....

Vallabh said...

तुम्हारे मूड का भी न, कोई भरोसा नही!

सही बात है...
मूड का क्या भरोसा किया जाय...
अच्छी रचना.. बधाई...

वल्लभ
http://puranidayari.blogspot.com/

गौतम राजरिशी said...

दिल तक पहुँचती हुई...जाने कितने किस्से याद दिलाती हुई...
शुक्रिया ओम साब एक बेमिसाल प्रेम-कविता के लिये !
संग लिये जा रहा हूँ किसी के लिये...

अजय कुमार झा said...

कमाल है ..ओम जी बहुत सुन्दर अंदाज ..मुझे तो बहुत पसंद आया ..

Priya said...

mood hai ya khwab . ..... jo bhi hai khoobsoorat hai

शायदा said...

sachmuch koi bharosa nahi.

आदित्य आफ़ताब "इश्क़" said...

तुम्हारे मूड का भी ना कोई भरोसा नहीं ,...............पहली बार आज़ आपके ब्लॉग पर आया ,मुझे आपकी रचना का मूड दिल से पसंद आया ,सच्ची बात कही हैं आपने ओम भाई ...............

अभिषेक ओझा said...

मूड का तो ऐसा ही है जी और वो भी 'उनके' मूड की बात हो तो :)

संध्या आर्य said...

एक सुन्दर कविता......

दिगम्बर नासवा said...

KITNA KOMAL LIKHA HAI.........KOI DIL SE CHAHNE WAALA HI LIKHA SAKTA HAI OM JI........UNKE MOOD KI DAASTAAN LAJAWAAB HAI...BIKHRI YAADON KI TARAH

विनोद कुमार पांडेय said...

बढ़िया ओम जी..
सुंदर रचना

चंदन कुमार झा said...

सभी रचनायें एक से एक ...यह रचना भी बहुत बेहतरीन लगी.

योगेश ’अर्श’ said...

बहोत खूब ओम जी! मजा आ गया आपकी ये रचना पढके।