Wednesday, May 20, 2009

ताजे मौन देना

ये बातें
जिनका अस्तित्व मौन में है
जीवित हैं इस उम्मीद में
कि किसी दिन तुम्हारी छुअन
इन्हे मिल जाए शायद।


ये बातें किसी दायरे में नहीं
उनके सपने हैं निराकार
इन बातों का बयान सुना जाना है अभी बाकी


ये
बातें फ़िज़ा में भटकती रहती है
बेचैनी से साँसें लेते हुए
बदते हुए शोर के बीच
इनका दम घूँटता रहता है

कभी वक़्त मिले तो छू
कर इन्हे थोड़े ताज़े मौन दे देना।

7 comments:

अनिल कान्त : said...

kya baat hai
waah bahut khoob

Udan Tashtari said...

कभी वक़्त मिले तो छू
कर इन्हे थोड़े ताज़े मौन दे देना।

-क्या बात है, बहुत खूब!

संध्या आर्य said...

कभी वक़्त मिले तो छू कर इन्हे थोड़े ताज़े मौन दे देना। .........

बहुत ही खुबसूरत एहसास को बयान करती हुई ये पंक्तियाँ..........अच्छी रचना

रंजना said...

Sundar shabdon me komal abhivyakti badi manmohak lagi...

Aabhaar.

raj said...

aap to moun rah ke bhi boht kuchh kah dete hai.....

मोना परसाई "प्रदक्षिणा" said...

कभी वक़्त मिले तो छू कर इन्हे थोड़े ताज़े मौन दे देना।

abhinv klpana .man ko sukun phunchati hui si.

SWAPN said...

sunder abhivyakti