Sunday, July 19, 2009

यह एक कमजोर समय है मेरे लिए.

यह एक कमजोर समय है मेरे लिए.

एक कमजोर समय,
जब मैं सोंचने के लिए मजबूर हूँ,
तुम्हारी हरी हंसी के बारे में
ऑक्सीजन से भरी बातों के बारे में
तुम्हारे होंठ और तुम्हारे गेशुओं के बारे में
तुम्हारी बेवफाई की तमाम हरकतों के बावजूद.

इस कमजोर समय में
मैं चाहता हूँ
कमजोर हो जाओ तुम भी इतना
कि रोक न सको खुद को पुकारने से नाम मेरा
और आ जाओ दौड़ती हुई
लग जाओ गले

ताकि मैं हमारे बिखराव पे हाथ रख दूँ

तुम रोओं
और मैं भी

और फ़िर इतने दिनों से
ठहरा हुआ रिश्ता फ़िर से चल पड़े

यह एक कमजोर समय है मेरे लिए
और ऐसा दिन में कई बार है .

27 comments:

सैयद | Syed said...

बेहतरीन !!

mehek said...

lajawab ahivyakti

awaz do humko said...

behtareen likha

जितेन्द़ भगत said...

सुंदर भाव।

विनोद कुमार पांडेय said...

और रिश्तो की मजबूत धागों को फिर से पिरो कर
प्रेम की लहरों मे खो जाए..

बहुत सुंदर..कविता..
धन्यवाद!!!

योगेन्द्र मौदगिल said...

काव्यानुकूल भाव-प्रभाव... बधाई बंधुवर..

‘नज़र’ said...

आक्सीजन का प्रयोग मन भा रहा है, ऐसे प्रयोग अंग्रेजी कविताओं में ही मिलते हैं!
---
पढ़िए: सबसे दूर स्थित सुपरनोवा खोजा गया

M VERMA said...

ताकि मैं हमारे बिखराव पे हाथ रख दूँ
**************************
और फ़िर इतने दिनों से
ठहरा हुआ रिश्ता फ़िर से चल पड़े
=====
रिश्तो को पुनर्जीवित करने का यह अन्दाज अनोखा लगा. बहुत खूब

नीरज गोस्वामी said...

"ऑक्सीजन से भरी बातों के बारे में..." वाह ओम जी वाह...क्या उपमा है...बेजोड़...पूरी रचना ही बहुत अच्छी लगी.
नीरज

raj said...

rishte to chalte hi rahte hai...hmara rishta thodhi na khatam ho jata hai....wo ek baar ban gya to ban gya....duriya nazdikiya ahsaas ki hi baat hai......

raj said...

kavita ek dum dil se nikli hai.....

अजय कुमार झा said...

वह ॐ जी..सरल शब्दों में शाश्क्त भाव पैदा कर दिए आपने..बढ़िया रचना...

वन्दना अवस्थी दुबे said...

कमाल का शिल्प!!बहुत सुन्दर.

Pakhi said...

Ap to chhupe rustam hain.

Wishing "Happy Icecream Day
See my new Post on "Icecrem Day" at "Pakhi ki duniya"

संध्या आर्य said...

यह एक कमजोर समय है मेरे लिए.
-----------------------------जिन्दगी मे कमजोर समय और मजबूत दोनो ही आते है पर इन समयो से होकर इंसान् मजबूत बनता है न की कमजोर ,

...............एक सुन्दर भावाभिव्यक्ति ......

Mithilesh dubey said...

bahut khub om ji accha likhte ho aap aise hee likhte rahiye

karuna said...

ओमजी ,समय कभी कमज़ोर नहीं होता ,आदमी कमज़ोर होता है |एक काव्यमय ह्रदय भावों से इतना भरा होता है कि वह खुद को कमज़ोर नहीं महसूस करता |बुरा मत मानियेगा -आपको तो हमने बहुत मजबूत समझा था --फिर भी बधाई

अनिल कान्त : said...

क्या कहूं ...आप तो हर बार बहुत अच्छा लिखते हो ...

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

महफूज़ अली said...

om ji kya kahoon ? main ab? mujhe aisa lagta hai ki aap duniya ke dard ko samajhte hain....... aur wahi likhte hain...... jo baaki sirf sochte hain........ aisa lagta hai ki aap doosron ke mann ki baaten jaan lete hain..... ya phir yeh khudaai den hai........

ek ek lafz dil se nikla hai....... dil se utar ke haathon mein aa gaya hai....

bahut hi behtareen expression hai.... par kya karen..... rishte bhi na kaanch ki tarah hote hain ki ek baar chatak jaye.... to chatakne ka nishaan chhod hi jaate hain..... chahe lakh jod lo......

main likhna to bahut chahta hoon aapki khidmat mein........ par lafz kam pad rahe hain.....


itni behtareen rasaale ke liye apko badhaai.....

Babli said...

बहुत ही सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लिखी हुई आपकी ये रचना बहुत अच्छा लगा!

ओम आर्य said...

मुझे लगता है आप सब के आर्शीवाद के फल से और प्यार के कारण जो भी थोडा बहुत लिख पा रहा हूँ, आप सबको पसंद आ रहा है. कई लोगों की प्रतिक्रियाएं पढ़ कर और अच्छा करने को जो चाहता है. कभी कभी यूँ भी लगता है कि फलां रचना उम्मीद पे खड़ी नहीं उतरेगी, तो पोस्ट करने का जी नहीं चाहता. आप सबका बहुत आभार. दिल से.
मैं करुना जी से कहना चाहता हूँ कि मुझे कमजोर न समझे, पर इस दुनिया में तकलीफें ऐसी ऐसी आती हैं कि उन्हें देख कर इंसान चाहे कितना भी मजबूत हो, उन दुखों के मुकाबिले कमजोर हीं लगता है. ऐसा मेरा मानना है.

Ravi Srivastava said...

वाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है। आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी और हमें अच्छी -अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिलेंगे. बधाई स्वीकारें। आप के द्वारा दी गई प्रतिक्रियाएं मेरा मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन करती हैं। आशा है आप इसी तरह सदैव स्नेह बनाएं रखेगें… धन्यवाद !

sandhyagupta said...

Kai naye bimb gadhe hain aapne is kavita me.Prayog karte rahen.

sada said...

यह एक कमजोर समय है मेरे लिए

बहुत ही बेहतरीन शब्‍दों में व्‍यक्‍त किया आपने, आभार्

umesh said...

ati sundar bhawabhibykti....

डॉ .अनुराग said...

एक कमजोर लम्हे में मैंने तेरे लिए बददुआ मांगी ......ऐसा पढ़ा याद आया....आपकी कलम यूँ ही आबाद रहे

दिगम्बर नासवा said...

देरी से आने को क्षमा चाहता हूँ.............. बहूत ही गहरे अर्थ हैं इस रचना में.......... मिलन की चाह और अपमी कमजोरियों में भी बस मिलन की चाह .......... बार बार कई बार ऐसा हो दिन में........... कमाल की कल्पना है ओम जी आपकी इस रचना मैं........