Friday, July 3, 2009

वक्त मुझपे कर रहा है खाक से दस्तखत...

तुमने तो बताये नही
अपने दुःख,
अपनी परेशानियाँ
और मेरा मानना है कि
दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते

यूँ कब तक चलता
बिना रिश्ते के एक साथ जीना
बाहर-बाहर

आखिरकार हम नही रह पाए साथ
तुम नही हो
मेरे किसी रिश्ते में अब

और वक़्त
मुझपे कर रहा है खाक से दस्तखत...

जब मैं कहता हूँ तुमसे कि
वक़्त मुझपे कर रहा है खाक से दस्तख़त
तो सिर्फ़ यह मानते हुए
कि दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते

25 comments:

‘नज़र’ said...

और क्या कहें, सुन्दर कविता है

---
विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

जब मैं कहता हूँ तुमसे कि
वक़्त मुझपे कर रहा है खाक से दस्तख़त
तो सिर्फ़ यह मानते हुए
कि दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते

सुन्दर अभिव्यक्ति।

M Verma said...

दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते
---
मेरे किसी रिश्ते में अब
====
बहुत खूब ओम जी

सागर said...

ये अंतिम पैराग्राफ में बड़ी चालाकी बरती गुरु... जान ले लेला हो.... बहुते बढ़िया....

Science Bloggers Association said...

जीवन के गूढार्थ को आपने बखूबी समझ लिया है। शानदार कविता।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

कंचन सिंह चौहान said...

और मेरा मानना है कि
दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते


सही मनना है आपका।

yuva said...

Bahut badhiya prastuti

हिमांशु । Himanshu said...

’दुख बाँटे बगैर रिश्ते नहीं बनते’ और ’वक्त मुझपे कर रहा है खा़क से दस्तख़त’ की दुबारा आवृत्ति कविता में एक विचित्र प्रभाव पैदा कर रही है । यह प्रभाव यथास्थिति की स्वीकृति और उसी की कसक में समानतः दृष्ट है ।
बेहतरीन कविता । आभार ।

Dhiraj Shah said...

लगता है भाई आप चोट खाये हुये हो
पोस्ट लाजबाब है

raj said...

यूँ कब तक चलता
बिना रिश्ते के एक साथ जीना
बाहर-बाहर...dukh bol ke btaya to kya btaya...the best poem....

cartoonist anurag said...

om ji....
bahuut hi shandar rachna
hai...aapke shbdon ki jadoogari ka main kayal ho gaya....

Shama said...

Aap hamesha hausalaa afzaaye aur zarranawazee karte hain...bahot shukr guzaar hun...!
"Maun ke khaalee gharme.."...ise "aary maun" kaha jaa sakta hai...!

http://shama-baagwaanee.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

वन्दना अवस्थी दुबे said...

दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते
अन्दर तक चुभ जाने वाली बात!!! एक लिन्क दे रही हूं, ज़रूर देखें, कुछ आपके ही मिज़ाज़ के तेवर वहां भी हैं-www.avojha.blogspot.com

संध्या आर्य said...

और मेरा मानना है कि
दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते

आपका मानना बिल्कुल सही है ...........यही रिश्तो को गहराई देती है ..................


और वक़्त मुझपे कर रहा है खाक से दस्तखत...
...........................................................
गहरी पीडा की भाव लिये हुये पंक्तियाँ.........

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

beautifully narrated poem with sentiments ,touching ones heart.
read yr writings for first time and they deeply impressed me a lot.
with regards
dr.bhoopendra

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

beautifully narrated poem with sentiments ,touching ones heart.
read yr writings for first time and they deeply impressed me a lot.
with regards
dr.bhoopendra

अभिषेक ओझा said...

सही बात है ! बिना दुःख बांटे रिश्ते नहीं बनते.

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर लिखा है!

Nirmla Kapila said...

जब मैं कहता हूँ तुमसे कि
वक़्त मुझपे कर रहा है खाक से दस्तख़त
तो सिर्फ़ यह मानते हुए
कि दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते
sahee kahaa rishton kaa arth kee yahi hai nahin to kis kaam ke rishte bahut sundar abhivyakti hai shubhkamnayen

डॉ .अनुराग said...

दिलचस्प ..

काजल कुमार Kajal Kumar said...

दुख का रिश्ता सबसे मज़बूत रिश्ता होता है, जो टूट नहीं सकता.

Meenakshi Kandwal said...

आर्य जी, पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ।
"दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते"...
रिश्तों की असल बुनियाद की बेहद गहरी परिभाषा बुनी आपने। सच ही है दर्द बांटे बिना रिश्ते कभी गहराई तक दिल में नहीं समाते।

बवाल said...

बहुत ही सुन्दर रचना है ओम भाई। दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते ! क्या बात है ! वाह

ज्योति सिंह said...

जब मैं कहता हूँ तुमसे कि
वक़्त मुझपे कर रहा है खाक से दस्तख़त

तो सिर्फ़ यह मानते हुए
कि दुःख बांटे बगैर रिश्ते नही बनते .
aapki ye line jabardast hai .mere jahan pe sawar ho gayi .kuchh kah nahi pa rahi .bas sonch rahi hoon .achchha likhte hai .

itsme said...

aap bahut achaa likhtey ho keep it up