Friday, September 11, 2009

नादान

लाख बुलाया,
कितनी आवाज़े दी
पर माना नही
छत से उतर कर जीने पे बैठ गया आखिरकार

कहता है
बिना चाँद लिए उतरेगा नही

कितना नादान है
ये दिल मेरा!

31 comments:

Nirmla Kapila said...

vाह वाह ओम जी ये दिल ऐसी नादानियां ही करता है बहुत सुन्दर कम शब्दों मे बडी बात शुभकामनायें

विनोद कुमार पांडेय said...

Prem aur ehsaas darshata hua sundar rachana..

kaise utalega bina chand liye jab chand se ishak ho gayi hai use..

badhiya abhivyakti..badhayi.

कुलवंत हैप्पी said...

दिल ही तो है..जो मौन के खाली घर में हलचल बनाए रखता है। बहुत खूब

आशिक है, चोर नहीं

दिल पे किसी का जोर नहीं

अनिल कान्त : said...

dil bhi na jaane kya kya khwahishein karta hai

पारूल said...

bahut khuub...

kshama said...

Itne khayalat, itnee rachnayen hain,aapke paas...ghar khaalee na man khalee...!

vandana said...

हजारो ख्वाहिशे ऐसी कि हर खवाहिश पर दम निकले।
वाह्…………मज़ा आ गया।
कभी कभी ऐसी नादानिया कितनी खूबसूरत होती हैं ।

मैने आज एक नया ब्लोग शुरु किया है ।पधारने का कष्ट किजियेगा।

http://ekprayas-vandana.blogspot.com

Pankaj Mishra said...

वाह जी वाह
एक बात बतऒ कही आपने मेरी .... से तो नही बात की थी क्युकि कल यही बात मै उनको सुना रहा था , आज आप्ने लिख दिया :) अरे नही ओम भई मजाक कर रहा था . nice one
really!!!!

Mithilesh dubey said...

बहुत सुन्दर, शुभकामनायें.......

raj said...

kahta hai bina chand liye nahi utrega.....dil hai ke manta nahi par kya kare...aise to chand tare na tootenge apne aap...har do kadam pe apni bhi taqdeer chihye....

रश्मि प्रभा... said...

pyaari zidd hai...dil hi to hai

Navnit Nirav said...

achachha hai.......kahne ka andaj bahut bhaya.
Navnit Nirav

Babli said...

मासूमियत से भरी रचना! ऐसी नादानियाँ सभी को अच्छी लगती है! इसे कहते हैं सच्चा प्यार! अत्यन्त सुंदर और प्यार से भरी रचना !

योगेश स्वप्न said...

dil hai ki maanta nahin,

ise upar chadhaya hi kyun tha , chand dikhane ke liye. ab bhugto.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

"दिल भी इस ज़िद पे अडा है
किसी बच्चे की तरह,
या तो सब कुछ ही मुझे चाहिये
या कुछ भी नहीं"
बहुत सुन्दर.

Dipti said...

बहुत ख़ूबसूरत...

मीनू खरे said...

वाह जी वाह !!!! सुन्दर. शुभकामनायें.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

ओम जी, दिल तो नादान ही होता है। वैसे आपने दिल की नादानी को बहुत सलीके से बयां किया है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Shilpa said...

that was such a sweet poem!!!

दिगम्बर नासवा said...

YE NADAANI HI TO JEVAN HAI OM JI ... POORI JINDAGI KAM HAI IS NAADAANI PAR ..... LAJAWAAB LIKHA HAI ...

Apoorv said...

छत से उतर कर जीने पे बैठ गया आखिरकार

यहाँ आकर जीने मे बैठ जाना कविता को नये अर्थ देता है..और चार चाँद (बिना माँगे) लगा देता है इस आरजू की शिद्दत को..
..न जाने कितनी ख़्वाहिशें जो न छत पे जा सकती हैं और न ज़मीन पर आना चाहती हैं..बस जीने में बैठी रहती हैं..नाराज और उदास!!
खूबसूरत भाव..ऐज यूजुअल टु यू..

vikram7 said...

कहता है
बिना चाँद लिए उतरेगा नही
वाह ओम आर्य जी,बहुत सुन्दर

Udan Tashtari said...

आह!! ये नादान दिल! बावरा.

अल्पना वर्मा said...

बड़ी मासूम सी जिद्द है...दिल आखिर नादाँ दिल जो है!

वाणी गीत said...

मासूम दिल की नादाँ से जिद अच्छी कविता में ढल गयी है ..!!

निर्झर'नीर said...

abe utar bhi jaa nahii .to zindgii bhar royegaa yahi baitha baitha

LOL

nice one really...

sangeeta said...

om ary ji,

sabse pahale shukriya ki aap mere blog par aaye...

aur ab apka ye naadan dil...aisi hi chahten karta hai...bahut khoobsurat shabd diye hain...badhai

महफूज़ अली said...

ye dil aisi naadani baar baar karna chahega......

par chaand leke hi maanega.....

bahut oomda kavita...... chote se shabdon mein unfathomic bhaav.......


Gr8.........


touched up.......












(Sorry for late commenting...... aajkal thodi si vyastta badh gayi hai..... Once again sorry.....)

मुकेश कुमार तिवारी said...

ओम जी,

शब्दों की जादूगरी कोई आपसे सीखे मितव्ययता भी। कमाल करते हैं दिल तो आखिर दिल है।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

सैयद | Syed said...

कहता है
बिना चाँद लिए उतरेगा नही


..वाह ओम भाई... ऐसे जादुई शब्द आप ही इस्तेमाल कर सकते हैं... कमाल की रचना...

M VERMA said...

वाकई यह दिल नादान है
मचलता हे
क्भी गिरता है
तो कभी सम्भलता है