Monday, September 21, 2009

जब कभी...

जब भी चूम लेता हूँ
श्वेत-श्याम तस्वीर में
तेरे होठों को,

वे सुर्ख लाल हों जाती हैं

33 comments:

raj said...

जब भी चूम लेता हूँ
श्वेत-श्याम तस्वीर में
तेरे होठों को,

वे सुर्ख लाल हों जाती हैं ...tasveer me bhi jaan dal de apki kavita.....lajwab...

Pankaj Mishra said...

ओम भाई तस्वीरो में भी ऐसी बात
सुन्दर कल्पना

lalit sharma said...

ॐ जी आपने घायल करने वाली लाइन लिख दिन आज फिर हम दिन भर घायल रहेंगे, आनंद आ गया,

विनोद कुमार पांडेय said...

LaaZwaab..char laayine par behtareen..badhayi..

Nirmla Kapila said...

लाजवाब कल्पना बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिये

M VERMA said...

बेहतरीन
क्या कल्पना किया है

वन्दना said...

lajawaab kalpana..........badhayi

मीनू खरे said...

लाजवाब कल्पना. बधाई .

ambuj said...

jaan hi daal di tasveer mein,
ya aankhon ka hi dhokha hai..

Mithilesh dubey said...

वाह-वाह क्या बात है। आपकी ये रचना दिल तक उतर गयी।बहुत खुब, बधाई।

sanjay vyas said...

मौन के खाली घर का ये आलाप जीवन का संगीत लगा.

JHAROKHA said...

्बहुत बहुत सुन्दर रचना। नवरात्र की हार्दिक बधाई।
पूनम

फ़िरदौस ख़ान said...

जब भी चूम लेता हूँ
श्वेत-श्याम तस्वीर में
तेरे होठों को,
वे सुर्ख लाल हों जाती हैं

बहुत सुन्दर...

वन्दना अवस्थी दुबे said...

शब्द सजीव हो उठते हैं आपका हाथ लगते ही..

'अदा' said...

जब भी चूम लेता हूँ
श्वेत-श्याम तस्वीर में
तेरे होठों को,
वे सुर्ख लाल हों जाती हैं
are baap re !!
colour lab ka kaam kar rahe hain ka ?
ha ha ha ha
bahut sundar abhivyakti..
नवरात्र की हार्दिक बधाई।

दर्पण साह "दर्शन" said...

wow !!

bus ek door tak jaata WOW !!

आदित्य आफ़ताब "इश्क़" said...

ओम भाई .................ओम भाई ................आईई ................लव यू .........................

मुकेश कुमार तिवारी said...

ओम जी,

भावनाओं का कुशल चितेरा?

क्या इसके सिवाय कुछ और कहा जा सकता है? जान फूंक देते हो शब्दों में।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

kshama said...

Har rachnake..kya kahne!!!

Babli said...

अद्भुत रचना! बहुत ही सुंदर लगा! आपकी कल्पना बहुत ही अच्छी है! नवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें!

विपिन बिहारी गोयल said...

क्या बात है
बहुत खूब कहा आपने

यार पंजाबी said...

बहुत शानदार लिखा है आपने...

शायद आप ये लिखने वाले थे।

वे सुर्ख लाल हो जाते हैं

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

bahut gehri rachna OM ji maharaaj...

Udan Tashtari said...

ओह!! बहुत गजब!

दिगम्बर नासवा said...

जब भी चूम लेता हूँ
श्वेत-श्याम तस्वीर में
तेरे होठों को,
वे सुर्ख लाल हों जाती हैं ..

OM JI ........ AB IS ADA PAR KUCH KAHOO BHI TO KAISE ...... AAPKE PYAAR MEIN ITNI SHIDDAT HO TO AISA HONA LAAJIM HAI .......

BAHOOT HI KHOOBSOORAT EHSAAS .....

vishnu-luvingheart said...

bahut khoob.....
badhai.....

महफूज़ अली said...

waah omji ........ mazaa aa gaya........ surkh laal ho jaati hain........laajawaab.........









Deri se aane ke liye muaafi chahta hoon...... Reason aapko maloom hi hai....eid ki wajah se Gorakhpur mein tha...... apka SMS mila tha...... par mere mobile ne dhokha diya hua tha..... isliye jawaab nahi de saka...... Sorry for dat....

ज्योति सिंह said...

bahut khoob .

Navnit Nirav said...

ye baat dil pe bhi lagu hoti hai

dil to kale koyle jaisa hota hai
jab ishq ki hawa chhul leti hai usko
wo surkh laal ho jata hai.

achchha likh hai aapne.

navnit nirav

sada said...

बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां ।

Devendra said...

पढ़कर दिल बाग-बाग हो गया
इन पंक्तियों से
आपका ब्लाग
मालामाल हो गया।
---
हिन्द युग्म में प्रकाशित कविता भी पढ़ी है---
अच्छा लिखते हैं आप।

sangeeta said...

aapki ye rachna padh kar ek sher yaad aa gaya----

nazakat unaki kya kahiye ki
areez neele pad gaye
humane to bosa liya tha
khwaab men tasveer ka ....

sa said...
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