Sunday, June 14, 2009

उसने भी किनारे कर दिया मुझको !

उफनते समंदर में
डाल दिया ख़ुद को

उसकी आगोश में
गहरे डूबने के लिए

उसके पानी में
हमेशा कुछ छलकता दीखता था
मुझे लबालब करने को आतुर

सो उसकी अथाह उफनते पानीदार आगोश में
सरक गया मैं

पर उसने भी बहा कर
किनारे कर दिया मुझको

15 comments:

महेन्द्र मिश्र said...

बेहतरीन रचना बधाई.

अजय कुमार झा said...

उफ़ ये तो inthaa हो गयी..जी बताइये अब क्या किया जाए...हा..हा..हा..
बहुत ही सुन्दर...

डॉ. मनोज मिश्र said...

अच्छी रचना .

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है! लिखते रहिये!

Udan Tashtari said...

एक बेहतरीन उम्दा रचना..बधाई ओम भाई!!

raj said...

usne bhi bha ke kinare pe kar diya mujhko....boht sunder...

संध्या आर्य said...

प्यार ऐसी चीज होती है जिसमे डुबाना भी बहुत अच्छा लगता है .....पर समन्दर भी क्या करे उसमे निगलने की झमता नही होती है.........

एक खुबसूरत रचना......

बेहतरीन अभिव्यक्ति .........

हमेशा की तरह........

SWAPN said...

bahut khoob om ji , rachna damdaar lagi.

नीरज गोस्वामी said...

क्या बात कही है आपने...वाह...ओम जी...वाह..
नीरज

bhawna said...

doobane ki nahin samndar se tairne ki chaah kahiye ....fir samandar ki lahrein aapko kinare nahin chodengi.....bahut sundar likhtein hain aap :)

satish kundan said...

सबसे पहले ॐ जी आपका शुक्रिया की आप मेरे ब्लॉग पे आयें और इतना बढ़िया कमेन्ट किया....उसने भी किनारे कर दिया मुझे मुझको...प्रेम के चाशनी में डूबी हुई रचना है!!!!!!!! बधाई...आगे भी ब्लॉग में मिलना होगा..

दिगम्बर नासवा said...

om जी........... आपका लिखा किसी और दुनिया में ले जाता है hameshaa.......... गहरी सोच से nukalti है आपकी kavitaa........ लाजवाब है ये भी आपकी shaili में

AlbelaKhatri.com said...

athah ufante paanidar aagosh ka jawab nahin bhai !
atyant anoothi kalpna ..........
badhaai !

Prem Farrukhabadi said...

बेहतरीन रचना.बधाई !!

कंचन सिंह चौहान said...

सो उसकी अथाह उफनते पानीदार आगोश में
सरक गया मैं

पर उसने भी बहा कर
किनारे कर दिया मुझको

bahut khoob...!